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National/State02 Jun 2026, 11:15 pm

यूरोपीय संघ-पाकिस्तान के संयुक्त बयान पर भारत की कड़ी प्रतिक्रिया, जम्मू-कश्मीर पर टिप्पणी को बताया 'अनुचित'

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यूरोपीय संघ-पाकिस्तान के संयुक्त बयान पर भारत की कड़ी प्रतिक्रिया, जम्मू-कश्मीर पर टिप्पणी को बताया 'अनुचित'

नई दिल्ली: भारत ने यूरोपीय संघ और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर के उल्लेख को सिरे से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग हैं और इस पर किसी बाहरी हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह भारत का आंतरिक मामला है और किसी भी बाहरी पक्ष को इस पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। भारत ने इस तरह की अनुचित टिप्पणियों पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।

नई दिल्ली: भारत ने यूरोपीय संघ (ईयू) और पाकिस्तान के बीच जारी एक संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के संबंध में की गई टिप्पणियों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने इन टिप्पणियों को 'अनुचित' और 'भ्रामक' बताते हुए स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं, और इस मामले पर किसी भी बाहरी हस्तक्षेप या टिप्पणी की कोई आवश्यकता नहीं है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता, रणधीर जैसवाल ने एक कड़े बयान में कहा, "हम जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के संबंध में संयुक्त बयान में की गई टिप्पणियों को स्पष्ट रूप से खारिज करते हैं। ये टिप्पणियां अनुचित और भ्रामक हैं।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत की संप्रभुता और आंतरिक प्रशासन से संबंधित मामलों पर किसी भी बाहरी पक्ष को टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। यह भारत का एक सुस्थापित कूटनीतिक रुख है कि जम्मू-कश्मीर का मुद्दा पूरी तरह से देश का आंतरिक मामला है, और इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने के किसी भी प्रयास को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जम्मू-कश्मीर मुद्दे को उठाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, भारत ने बार-बार ऐसे प्रयासों का खंडन किया है और वैश्विक भागीदारों से आग्रह किया है कि वे भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संवैधानिक स्थिति का सम्मान करें। नई दिल्ली का मानना है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक राजनीतिक और आर्थिक समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे मुद्दों का सहारा ले रहा है।

भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में चल रहे विकास कार्यों, चुनावी प्रक्रियाओं और निवेश को बढ़ावा देने जैसे कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये क्षेत्र देश के साथ एकीकृत हो रहे हैं और सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं। मंत्रालय का यह कड़ा रुख अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह संदेश देने के उद्देश्य से भी है कि भारत के साथ रणनीतिक और आर्थिक सहयोग में देश के आंतरिक क्षेत्रीय मामलों पर अनुचित टिप्पणियों को शामिल नहीं किया जाना चाहिए।

इस कूटनीतिक प्रतिक्रिया के माध्यम से, भारत ने अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराया है। यह घटनाक्रम भारत की विदेश नीति के उस सिद्धांत को भी उजागर करता है कि द्विपक्षीय या बहुपक्षीय मंचों पर भारत के आंतरिक मामलों पर की गई किसी भी अनुचित टिप्पणी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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