सीबीएसई में बड़े फेरबदल: लोकखंडे सीताराम बने नए अध्यक्ष, वरुण भारद्वाज नए सचिव नियुक्त

सीबीएसई में बड़े फेरबदल: लोकखंडे सीताराम बने नए अध्यक्ष, वरुण भारद्वाज नए सचिव नियुक्त • ओएसएम प्रणाली पर विवाद के बीच नियुक्तियां • वरिष्ठ आईएएस अधिकारी लोकखंडे सीताराम को कमान • मौके पर जांच और सुधार की प्रक्रिया जारी • नए सचिव के तौर पर वरुण भारद्वाज की नियुक्ति ने बताया कि केंद्र सरकार ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) में महत्वपूर्ण प्रशासनिक नियुक्तियां की हैं। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी लोकखंडे सीताराम को सीबीएसई का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि वरुण भारद्वाज को बोर्ड का नया सचिव बनाया गया है। यह नियुक्तियां ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली को लेकर चल रहे विवादों के बीच हुई हैं।
सीबीएसई में बड़े फेरबदल: लोकखंडे सीताराम बने नए अध्यक्ष, वरुण भारद्वाज नए सचिव नियुक्त • ओएसएम प्रणाली पर बढ़ते विवाद के बीच सीबीएसई में शीर्ष पदों पर महत्वपूर्ण प्रशासनिक नियुक्तियां • वरिष्ठ आईएएस अधिकारी लोकखंडे सीताराम को सौंपी गई केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के अध्यक्ष की कमान • मौके पर जांच और सुधार की प्रक्रियाएं शुरू, छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं को दूर करने का प्रयास • भारतीय सूचना सेवा के अधिकारी वरुण भारद्वाज की बोर्ड के नए सचिव के रूप में नियुक्ति, विस्तृत कार्यकाल की संभावना ने बताया कि केंद्र सरकार ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) में महत्वपूर्ण प्रशासनिक फेरबदल करते हुए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी लोकखंडे सीताराम को बोर्ड का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह नियुक्ति बोर्ड की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली को लेकर चल रहे व्यापक विवादों और आलोचनाओं के बीच हुई है। सरकार ने इस डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की खरीद और कार्यान्वयन की निष्पक्ष जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन भी किया है। वरुण भारद्वाज, जो 2008 बैच के भारतीय सूचना सेवा (आईआईएस) के अधिकारी हैं और वर्तमान में उच्च शिक्षा विभाग में निदेशक के पद पर कार्यरत थे, उन्हें सीबीएसई के नए सचिव के रूप में नामित किया गया है। वे हिमांशु गुप्ता का स्थान लेंगे। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, श्री भारद्वाज केंद्रीय स्टाफिंग योजना के तहत 19 सितंबर, 2027 तक इस महत्वपूर्ण पद पर अपनी सेवाएं देंगे, जो उनके कार्यकाल की लंबी अवधि को दर्शाता है। यह नेतृत्व परिवर्तन विशेष रूप से उस समय हुआ है जब ओएसएम प्रणाली, जिसे इस वर्ष कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए पेश किया गया था, छात्रों और अभिभावकों के बीच व्यापक आलोचना का विषय बनी हुई है। इस डिजिटल मूल्यांकन ढांचे के तहत, परीक्षकों को उत्तर पुस्तिकाओं की भौतिक प्रतियों के बजाय स्कैन की गई प्रतियों का मूल्यांकन करना था। हालांकि, इस प्रणाली के कार्यान्वयन के बाद से छात्रों ने कई समस्याओं की ओर इशारा किया है, जिनमें तकनीकी गड़बड़ियां, भुगतान संबंधी मुद्दे, पुनर्मूल्यांकन प्रक्रियाओं में अप्रत्याशित देरी और कथित तौर पर अनियमितताएं शामिल हैं। छात्रों और अभिभावकों द्वारा उठाई गई इन गंभीर चिंताओं के जवाब में, केंद्र सरकार ने सक्रिय कदम उठाए हैं। कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के तहत, क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान की अध्यक्षता में एक एक-सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है। इस समिति को ओएसएम सेवाओं की खरीद प्रक्रिया की गहन जांच करने और यह पता लगाने का महत्वपूर्ण कार्य सौंपा गया है कि क्या खरीद मानदंडों में किसी विशेष विक्रेता को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से ढील दी गई थी। समिति को आगामी एक महीने के भीतर कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग को अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। इस बीच, सीबीएसई ने छात्रों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से पुनर्मूल्यांकन पोर्टल को फिर से खोल दिया है। यह पोर्टल 2 जून से 6 जून तक खुला रहेगा। इस अवधि के दौरान, पात्र छात्र, जिन्होंने अपनी मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई प्रतियां प्राप्त कर ली हैं, वे अपने अंकों के सत्यापन के लिए आवेदन कर सकते हैं और विशिष्ट उत्तरों के पुनर्मूल्यांकन का अनुरोध कर सकते हैं। यह कदम छात्रों के बीच व्याप्त असंतोष को कम करने और मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के सरकारी प्रयास का हिस्सा है। मौके पर, बोर्ड के अधिकारियों के बीच बैठकों का दौर जारी है ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचा जा सके।

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