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National/State02 Jun 2026, 08:15 pm

झारखंड में हर घर नल की राह आसान: केंद्र संग एमओयू, सीएम ने मांगे ₹6500 करोड़

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झारखंड में हर घर नल की राह आसान: केंद्र संग एमओयू, सीएम ने मांगे ₹6500 करोड़

• जल जीवन मिशन 2.0 के तहत एमओयू पर हस्ताक्षर • सीएम सोरेन ने केंद्र से बकाया राशि की मांग की • राज्य में 55% परियोजनाएं पूरी, केंद्रीय सहायता 46% • जल सखियों की नियुक्ति और मानदेय पर जोर झारखंड सरकार ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्र सरकार के साथ जल जीवन मिशन 2.0 के तहत एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य राज्य के प्रत्येक ग्रामीण घर तक नल से जल पहुंचाना है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस अवसर पर केंद्र से जल जीवन मिशन के तहत लगभग ₹6500 करोड़ के बकाया भुगतान की शीघ्र रिहाई का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि 2019-20 से राज्य में ₹24,635 करोड़ की लागत से जल परियोजनाएं चल रही हैं, जिनमें से लगभग 55% पूरी हो चुकी हैं, जबकि केंद्रीय सहायता का केवल 46% ही प्राप्त हुआ है।

• झारखंड में हर घर नल से जल पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम, केंद्र संग एमओयू पर हस्ताक्षर • मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र से ₹6500 करोड़ के बकाया भुगतान की तत्काल रिहाई की मांग की, योजनाओं की गति पर चिंता जताई • राज्य में ₹24,635 करोड़ की लागत से चल रही जल परियोजनाओं में अब तक 55% काम पूरा, केंद्रीय सहायता का केवल 46% प्राप्त • केंद्रीय विभागों से एनओसी मिलने में देरी और वित्तीय सहायता की कमी परियोजनाओं को बाधित कर रही है: मुख्यमंत्री झारखंड सरकार ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्र सरकार के साथ जल जीवन मिशन 2.0 के तहत एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस एमओयू का मुख्य उद्देश्य राज्य के प्रत्येक ग्रामीण घर तक सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करना है, जो कि एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य है। इस महत्वपूर्ण हस्ताक्षर समारोह के अवसर पर, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार से जल जीवन मिशन के तहत राज्य के लिए लंबित लगभग ₹6500 करोड़ के बकाया भुगतान की शीघ्र रिहाई का पुरजोर आग्रह किया। मुख्यमंत्री सोरेन ने विस्तार से बताया कि वर्ष 2019-20 से राज्य में इस मिशन के तहत ₹24,635 करोड़ की भारी लागत से विभिन्न पेयजल योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। इन योजनाओं में बहु-ग्रामीय और एकल-ग्रामीय दोनों तरह की परियोजनाएं शामिल हैं, जिनका उद्देश्य दूरदराज के इलाकों तक पानी पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि अब तक इन परियोजनाओं का लगभग 55 प्रतिशत कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। हालांकि, उन्होंने चिंता व्यक्त की कि स्वीकृत केंद्रीय सहायता का केवल 46 प्रतिशत ही राज्य को प्राप्त हुआ है, जो परियोजनाओं की गति को प्रभावित कर रहा है। मुख्यमंत्री ने समय पर वित्तीय सहायता की आवश्यकता पर विशेष बल देते हुए कहा कि इससे चल रही परियोजनाओं की गति को बनाए रखने और उन्हें समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि विभिन्न केंद्रीय विभागों और एजेंसियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त करने की प्रक्रिया में होने वाली देरी भी राज्य में पेयजल परियोजनाओं के समय पर पूरा होने में एक बड़ी बाधा बन रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस प्रक्रिया को तेज करने और सुगम बनाने के लिए तत्काल कदम उठाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि राज्य सरकार ने गांवों में एकल-ग्रामीय योजनाओं के संचालन के लिए 'जल सखियों' की नियुक्ति की है, जिन्हें मासिक ₹2500 का मानदेय दिया जा रहा है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण व्यवस्था को बनाए रखने और जल सखियों के प्रोत्साहन के लिए केंद्र से निरंतर समर्थन मांगा। उन्होंने भविष्य की योजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में सभी आवश्यक घटकों को शामिल करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस एमओयू का उद्देश्य राज्य में जल जीवन मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में तेजी लाना है। अधिकारियों ने प्रभावी कार्यान्वयन और निर्धारित समय-सीमा के भीतर लक्ष्यों को प्राप्त करने के महत्व पर जोर दिया। राष्ट्रीय स्तर पर, जल जीवन मिशन का लक्ष्य 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण घर में नल से जल की आपूर्ति सुनिश्चित करना है। झारखंड जैसे राज्यों के लिए, जहां भौगोलिक और अवसंरचनात्मक चुनौतियां अधिक हैं, इस तरह के समझौते और केंद्रीय सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

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