गुजरात: हस्तकला सेतु योजना से ₹102 करोड़ की बिक्री, 50 हजार से अधिक को मिला रोजगार

• कारीगरों के जीवन में आया आर्थिक बदलाव • सरकारी योजना से मिला बाजार और प्रशिक्षण • महिला लाभार्थियों की बड़ी भागीदारी • डिजिटल मार्केटिंग से बढ़ी पहुंच गुजरात की हस्तकला सेतु योजना ने ₹102 करोड़ से अधिक की बिक्री दर्ज की है और 50,000 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा किए हैं। योजना के तहत 21,690 से अधिक कारीगर पंजीकृत हैं, जिनमें 82% महिलाएं हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, लगभग ₹58 करोड़ का निवेश किया गया है। कारीगरों को कौशल प्रशिक्षण और डिजिटल मार्केटिंग में सहायता प्रदान की गई है, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
• गुजरात की हस्तकला सेतु योजना ने रचा इतिहास: ₹102 करोड़ की बिक्री और 50,000 से अधिक रोजगार • महिला सशक्तिकरण का प्रतीक: 82% लाभार्थी महिलाएं, सामाजिक रूप से वंचितों को भी मिला अवसर • प्रशिक्षण और कौशल विकास पर जोर: उद्यमिता से लेकर डिजिटल मार्केटिंग तक का सफर • बाजार से सीधे जुड़ाव: 9,300 से अधिक कारीगरों को मिले खरीदार, ई-कॉमर्स से बढ़ी आय गुजरात राज्य में पारंपरिक कलाओं और शिल्पों को पुनर्जीवित करने तथा स्थानीय कारीगरों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से शुरू की गई 'हस्तकला सेतु योजना' (HSY) ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। राज्य सरकार द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के कार्यान्वयन के बाद से अब तक ₹102.08 करोड़ की संचयी बिक्री दर्ज की गई है, साथ ही 50,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। इस महत्वाकांक्षी योजना के क्रियान्वयन पर राज्य सरकार ने लगभग ₹58 करोड़ का महत्वपूर्ण निवेश किया है।
योजना का एक प्रमुख पहलू कारीगरों के सशक्तिकरण पर इसका विशेष ध्यान रहा है। अब तक 21,690 से अधिक कारीगरों को इस योजना के तहत पंजीकृत किया गया है। इनमें से 82 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके अतिरिक्त, योजना ने सामाजिक रूप से वंचित समुदायों, जैसे अनुसूचित जाति (21 प्रतिशत), अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (34 प्रतिशत) के कारीगरों को भी सक्रिय रूप से शामिल किया है, जिससे समावेशी विकास सुनिश्चित हुआ है।
योजना के तहत कारीगरों के कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए गए हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, 15,586 कारीगरों ने उद्यमिता विकास प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जो उन्हें अपने व्यवसाय को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में मदद करता है। वहीं, 9,292 कारीगरों को उनकी विशिष्ट कलाओं से संबंधित विशेष कौशल-आधारित प्रशिक्षण प्रदान किया गया है, जिससे उनके उत्पादों की गुणवत्ता और नवीनता में वृद्धि हुई है। कारीगरों को निरंतर समर्थन प्रदान करने के लिए, 70 से अधिक मास्टर ट्रेनरों और 150 से अधिक मेंटर्स का एक नेटवर्क स्थापित किया गया है।
बाजार पहुंच में सुधार योजना का एक और महत्वपूर्ण स्तंभ रहा है। लगभग 9,300 कारीगरों को सीधे खरीदारों के साथ व्यापार-से-व्यापार (B2B) ऑर्डर के माध्यम से जोड़ा गया है। इस प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए सात बी2बी बैठकें और चार फैशन शो का आयोजन किया गया, जिससे कारीगरों, डिजाइनरों और उद्योग के हितधारकों के बीच सीधा संवाद संभव हुआ।
डिजिटल क्रांति का लाभ उठाते हुए, 2,000 से अधिक कारीगरों को डिजिटल मार्केटिंग का प्रशिक्षण दिया गया है और उन्हें Amazon, Flipkart Samarth, Meesho और Etsy जैसे प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। इस डिजिटल जुड़ाव ने न केवल उनकी पहुंच का विस्तार किया है, बल्कि उनकी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जहां पहले केवल नौ प्रतिशत कारीगर प्रतिमाह ₹15,000 से अधिक कमाते थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 50 प्रतिशत हो गया है। हस्तशिल्प को अपनी आय का मुख्य स्रोत मानने वाले कारीगरों का प्रतिशत 20 से बढ़कर 45 हो गया है।
योजना के कार्यान्वयन के दौरान कुछ चुनौतियां भी सामने आईं, जिनमें अपर्याप्त दस्तावेजीकरण, वित्तीय अभिसरण में देरी, आधुनिक तकनीक को अपनाने में सीमितता और कमजोर विपणन तंत्र शामिल थे। इन मुद्दों के समाधान के लिए प्रौद्योगिकी उन्नयन, डिजाइन नवाचार, बाजार विविधीकरण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर ध्यान केंद्रित किया गया है। मूल रूप से 2019-20 के लिए तीन साल की योजना को कोविड-19 महामारी के कारण हुए व्यवधानों के बाद 2025-26 तक बढ़ाया गया है।



