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National/State02 Jun 2026, 03:31 pm

गुजरात में 'यूनिवर्सल एफिडेविट' लागू, सरकारी दफ्तरों में अब एक ही हलफनामा मान्य

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गुजरात में 'यूनिवर्सल एफिडेविट' लागू, सरकारी दफ्तरों में अब एक ही हलफनामा मान्य

• एक ही हलफनामा, अनेक सरकारी काम • प्रशासनिक सुधारों की पहल • दफ्तरों में एकरूपता का प्रयास • डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध ने गुजरात सरकार के इस बड़े प्रशासनिक सुधार की शुरुआत की है। सोमवार को राज्यव्यापी 'यूनिवर्सल एफिडेविट' की शुरुआत हुई, जिससे सरकारी दफ्तरों और सेवा केंद्रों में अब केवल एक ही मानक हलफनामा स्वीकार किया जाएगा। यह पहल नागरिकों के लिए विभिन्न सरकारी सेवाओं, प्रमाण पत्रों और योजनाओं हेतु अलग-अलग हलफनामों की आवश्यकता को समाप्त करती है। कानून विभाग के अनुसार, यह कदम प्रक्रियाओं को सरल बनाने और देरी कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

• गुजरात में 'यूनिवर्सल एफिडेविट' की शुरुआत, सरकारी कामकाज में आई सरलता • नागरिक अब विभिन्न सेवाओं के लिए केवल एक ही हलफनामा प्रस्तुत करेंगे • प्रशासनिक सुधारों के तहत दस्तावेजीकरण के बोझ को किया गया कम • डिजिटल माध्यमों से भी आसानी से उपलब्ध होगा नया मानकीकृत प्रारूप गुजरात सरकार ने सोमवार को एक ऐतिहासिक प्रशासनिक सुधार की घोषणा करते हुए पूरे राज्य में 'यूनिवर्सल एफिडेविट' की शुरुआत की है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं, प्रमाण पत्रों और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए आवश्यक दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया को अत्यंत सरल बनाना है। अब से, राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों और सेवा केंद्रों में केवल एक ही मानक हलफनामा प्रारूप को स्वीकार किया जाएगा, जिससे नागरिकों को अलग-अलग विभागों के लिए बार-बार विभिन्न हलफनामों की आवश्यकता से मुक्ति मिल जाएगी।

राज्य के कानून विभाग द्वारा जारी की गई इस पहल का लक्ष्य प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना, सरकारी सेवाओं तक नागरिकों की पहुंच को बेहतर बनाना और बार-बार लगने वाले दस्तावेजीकरण की आवश्यकताओं के कारण होने वाली देरी को कम करना है। सरकार के अनुसार, यह निर्णय विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा उपयोग किए जाने वाले कई हलफनामा प्रारूपों के कारण उत्पन्न होने वाली पुरानी समस्याओं का समाधान करेगा। अधिकारियों का कहना है कि हलफनामों के प्रारूपों में एकरूपता की कमी अक्सर नागरिकों के बीच भ्रम पैदा करती थी, उनके लिए दस्तावेजों का बोझ बढ़ाती थी और अंततः प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी का कारण बनती थी।

इस प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए, कानून विभाग ने एक मानकीकृत हलफनामा प्रारूप तैयार किया है, जिसे गुजराती और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध कराया गया है। यह प्रारूप राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों, सेवा केंद्रों और जिला, तालुका, ग्रामीण तथा शहरी स्तरों पर कार्यरत अधिकारियों द्वारा अनिवार्य रूप से स्वीकार किया जाएगा। इस सुधार का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसे डिजिटल सेवा प्लेटफार्मों, जैसे कि 'डिजिटल गुजरात' पोर्टल और 'जन सेवा केंद्रों' में भी एकीकृत किया जाएगा। इससे नागरिक ऑनलाइन सेवाओं के लिए आवेदन करते समय भी इसी एकल, मानकीकृत हलफनामा प्रारूप का उपयोग कर सकेंगे, जिससे ऑनलाइन प्रक्रियाओं में भी आसानी होगी।

हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था केवल उन मामलों में लागू होगी जहाँ कानून या नियमों के तहत हलफनामा प्रस्तुत करना अनिवार्य है और उसके लिए कोई विशेष प्रारूप निर्धारित नहीं है। जिन सरकारी सेवाओं के लिए हलफनामा जमा करने की कोई कानूनी आवश्यकता नहीं है, वहां स्व-घोषणा की मौजूदा सरलीकृत प्रक्रिया जारी रहेगी। इस प्रकार, हलफनामा को इन मामलों में अनिवार्य नहीं बनाया गया है। इस 'यूनिवर्सल एफिडेविट' पहल का अंतिम लक्ष्य सरकारी प्रक्रियाओं में अधिक एकरूपता लाना, दस्तावेजीकरण की आवश्यकताओं को कम करना और गुजरात में सरकारी सेवाओं को नागरिकों के लिए अधिक सुलभ और मित्रवत बनाना है।

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