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Health02 Jun 2026, 11:01 am

ब्रेस्ट कैंसर: जेनेटिक टेस्ट से कीमोथेरेपी से बच सकती हैं कई महिलाएं

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ब्रेस्ट कैंसर: जेनेटिक टेस्ट से कीमोथेरेपी से बच सकती हैं कई महिलाएं

• कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट्स से मुक्ति • जेनेटिक टेस्ट से ट्यूमर की आक्रामकता का पता • दो-तिहाई महिलाओं को कीमो से राहत संभव • भविष्य में उपचार का नया मानक से एक महत्वपूर्ण जेनेटिक टेस्ट, प्रोसिग्ना, दो-तिहाई शुरुआती हार्मोन-संचालित ब्रेस्ट कैंसर वाली महिलाओं को कीमोथेरेपी से बचने में मदद कर सकता है। यह टेस्ट ट्यूमर के जीनों की गतिविधि को मापता है, जिससे उसकी आक्रामकता का पता चलता है। कम स्कोर वाले मरीजों को कीमो की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे वे गंभीर दुष्प्रभावों से बचेंगे। यह उपचार में एक बड़ा कदम है, जो अनावश्यक कीमोथेरेपी को कम करेगा।

• जेनेटिक टेस्ट से कीमोथेरेपी से बचाव: ब्रेस्ट कैंसर उपचार में एक महत्वपूर्ण प्रगति • प्रोसिग्ना टेस्ट का कार्य सिद्धांत: ट्यूमर की आक्रामकता का आणविक स्तर पर विश्लेषण • ऑप्टिमा ट्रायल के विस्तृत परिणाम: कीमोथेरेपी से बचने के सुरक्षित विकल्प का प्रमाण • भविष्य की दिशा: व्यक्तिगत उपचार, स्वास्थ्य प्रणाली पर बोझ में कमी और व्यापक स्वीकृति • जेनेटिक परीक्षणों का बढ़ता दायरा: अन्य कैंसर प्रकारों में भी अनुप्रयोग की संभावना से ब्रेस्ट कैंसर के उपचार में एक अभूतपूर्व प्रगति हुई है, जहां एक विशेष जेनेटिक टेस्ट, प्रोसिग्ना, दो-तिहाई शुरुआती हार्मोन-संचालित ब्रेस्ट कैंसर वाली महिलाओं को कीमोथेरेपी के कठोर उपचार से सुरक्षित रूप से बचने में मदद कर सकता है। यह जानकारी हाल ही में प्रस्तुत किए गए ऑप्टिमा ट्रायल के निष्कर्षों से सामने आई है, जो बताता है कि यह डीएनए-आधारित ट्यूमर परीक्षण, जीवित रहने की दर को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किए बिना, कीमोथेरेपी के गंभीर दुष्प्रभावों को कम कर सकता है।

प्रोसिग्ना टेस्ट ट्यूमर के अंदर कैंसर-संबंधी जीनों की गतिविधि को मापता है। यह पारंपरिक माइक्रोस्कोपिक विश्लेषण से परे जाकर, कैंसर कोशिकाओं के अंदर झांकता है और यह निर्धारित करता है कि कौन से जीन कितनी सक्रियता से चालू या बंद हैं। इस जानकारी के आधार पर, एक स्कोर की गणना की जाती है जो ट्यूमर की आक्रामकता और मानक उपचार के बाद उसके वापस आने की संभावना को दर्शाता है। यदि यह स्कोर कम होता है, तो इसका मतलब है कि कैंसर कम आक्रामक है और सर्जरी, रेडियोथेरेपी और हार्मोन की गोलियां पर्याप्त हैं, जिससे कीमोथेरेपी को सुरक्षित रूप से टाला जा सकता है। इसके विपरीत, उच्च स्कोर का मतलब है कि कैंसर के लौटने का अधिक जोखिम है, और कीमोथेरेपी की सिफारिश की जाती है।

ऑप्टिमा ट्रायल, जिसमें यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने नेतृत्व किया और 4,400 से अधिक महिलाओं ने भाग लिया, ने इस दृष्टिकोण की प्रभावशीलता और सुरक्षा को साबित किया। यह अध्ययन विशेष रूप से हार्मोन-संचालित, प्रारंभिक चरण के ब्रेस्ट कैंसर पर केंद्रित था, जो HER2 प्रोटीन के बजाय एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन से प्रेरित होता है। ट्रायल में, जिन महिलाओं को पारंपरिक उपायों से उच्च जोखिम वाला माना गया था, उनमें से दो-तिहाई से अधिक महिलाएं, यदि उनका जेनेटिक टेस्ट स्कोर कम था, तो वे कीमोथेरेपी से बच गईं। इससे उन्हें बालों के झड़ने, मतली, थकान, संक्रमण के जोखिम, शीघ्र रजोनिवृत्ति, संभावित बांझपन और दीर्घकालिक हृदय या तंत्रिका संबंधी प्रभावों जैसे दुष्प्रभावों से बचाया गया।

इस शोध के निष्कर्षों का मतलब है कि भविष्य में स्वास्थ्य प्रणालियां, जैसे कि यूके में नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड केयर एक्सीलेंस (Nice), इस टेस्ट को व्यापक रूप से अपनाने पर विचार करेंगी। यह उम्मीद की जाती है कि प्रोसिग्ना या इसी तरह के परीक्षणों का उपयोग अधिक सुलभ हो जाएगा, जिससे अनावश्यक उपचारों में कमी आएगी। पांच साल की जीवित रहने की दर में मामूली अंतर (93.7% बनाम 94.9%) को कीमोथेरेपी से बचने के लाभों के मुकाबले स्वीकार्य माना गया है। यह परीक्षण उन उच्च-जोखिम वाले रोगियों की पहचान करने में भी मदद करता है जिन्हें वास्तव में कीमोथेरेपी की आवश्यकता है, जिससे उपचार अधिक केंद्रित और प्रभावी होता है।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह परीक्षण सभी प्रकार के ब्रेस्ट कैंसर पर लागू नहीं होता है। यह विशेष रूप से हार्मोन-संचालित, HER2-नकारात्मक, प्रारंभिक चरण के कैंसर के लिए है। ट्रिपल-नेगेटिव और HER2-पॉजिटिव ब्रेस्ट कैंसर जैसे अन्य उपप्रकारों के लिए उपचार भिन्न होते हैं। साथ ही, 40 वर्ष से कम उम्र की युवा महिलाओं के लिए भी जोखिम पैटर्न भिन्न हो सकते हैं। इसलिए, यह एक 'वन-साइज़-फिट्स-ऑल' समाधान नहीं है, बल्कि एक महत्वपूर्ण उपकरण है जो डॉक्टरों और रोगियों को अधिक सूचित निर्णय लेने में मदद करता है। जेनेटिक परीक्षणों का उपयोग अन्य कैंसर जैसे फेफड़ों, आंतों और प्रोस्टेट कैंसर में भी उपचार निर्णयों को निर्देशित करने के लिए बढ़ रहा है, जो व्यक्तिगत उपचार की ओर एक व्यापक बदलाव का संकेत देता है।

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