नार्वे में भारत-नार्वे व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने पहुंचे सांसद श्रीभरत

नार्वे भारत व्यापार दिवस में भाग लेने पहुंचे विशाखापत्तनम सांसद श्रीभरत। ओस्लो में नार्वे तेलुगु एसोसिएशन ने किया स्वागत। यह आयोजन भारत-नार्वे के बीच आर्थिक और सामरिक सहयोग बढ़ाने का महत्वपूर्ण मंच है। श्रीभरत ने कहा कि यह आंध्र प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने का गौरव है। उन्होंने नार्वे तेलुगु एसोसिएशन के प्रयासों की सराहना की। • नार्वे में भारतीय सांसद का आगमन • व्यापारिक सहयोग बढ़ाने का अवसर • तेलुगु समुदाय ने किया स्वागत • सांस्कृतिक एकता पर जोर
विशाखापत्तनम के सांसद एम. श्रीभरत, भारत और नार्वे के बीच द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने के उद्देश्य से नार्वे की राजधानी ओस्लो पहुंच गए हैं। वे यहां 2 और 3 जून को आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित 'नार्वे भारत व्यापार दिवस 2026' कार्यक्रम में भाग लेंगे। उनके आगमन पर नार्वे तेलुगु एसोसिएशन के सदस्यों ने उनका हार्दिक स्वागत किया, जो इस यात्रा के सांस्कृतिक और सामुदायिक महत्व को दर्शाता है।
• नार्वे में भारत-नार्वे व्यापार दिवस का शुभारंभ, सांसद श्रीभरत ने बढ़ाई देश की शान • आर्थिक और सामरिक सहयोग को नई दिशा देने का अवसर, व्यापारिक संबंध होंगे प्रगाढ़ • नार्वे में तेलुगु समुदाय ने किया सांसद का भव्य स्वागत, सांस्कृतिक एकता का प्रदर्शन • आंध्र प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने का गौरव, भविष्य की पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक संरक्षण पर जोर सांसद श्रीभरत ने इस अवसर पर कहा कि नार्वे इंडिया चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (NICCI) द्वारा आयोजित यह सम्मेलन भारत और नार्वे के बीच आर्थिक और सामरिक सहयोग को मजबूत करने के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह उनके लिए और नंड्याल की सांसद बायरेड्डी शबरी के लिए गर्व की बात है कि वे उस समय आंध्र प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं जब भारत और नार्वे विभिन्न रणनीतिक क्षेत्रों में अपने सहयोग का सक्रिय रूप से विस्तार कर रहे हैं। यह साझेदारी दोनों देशों के लिए पारस्परिक विकास के नए द्वार खोलेगी।
सांसद श्रीभरत ने नार्वे में बसे तेलुगु समुदाय द्वारा उनके प्रति दिखाए गए स्नेह और गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से 2016 में स्थापित नार्वे तेलुगु एसोसिएशन के प्रयासों की सराहना की। यह एसोसिएशन न केवल तेलुगु भाषी परिवारों को एक साथ लाने का कार्य करता है, बल्कि सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। श्रीभरत ने एसोसिएशन के अध्यक्ष वेंकट के नेतृत्व की भी प्रशंसा की, जिन्होंने भविष्य की पीढ़ियों के बीच तेलुगु भाषा, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित और बढ़ावा देने के लिए सराहनीय कार्य किया है। यह प्रयास प्रवासी समुदायों के लिए अपनी जड़ों से जुड़े रहने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। नार्वे भारत के लिए एक महत्वपूर्ण यूरोपीय भागीदार है, विशेष रूप से समुद्री, ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में। 'नार्वे भारत व्यापार दिवस' जैसी पहलें इन संबंधों को और मजबूत करने में सहायक सिद्ध होंगी।


