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National/State01 Jun 2026, 09:45 pm

भारत-म्यांमार ने मजबूत रणनीतिक साझेदारी की पुष्टि की, सहयोग के नए द्वार खोले

देश की रोशनी
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भारत-म्यांमार ने मजबूत रणनीतिक साझेदारी की पुष्टि की, सहयोग के नए द्वार खोले

• द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर जोर • कनेक्टिविटी परियोजनाओं में तेजी लाने की सहमति • व्यापार और निवेश बढ़ाने पर हुआ मंथन • सुरक्षा सहयोग को लेकर साझा प्रतिबद्धता ने बताया कि भारत और म्यांमार ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने का संकल्प लिया है। राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग की भारत यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने कनेक्टिविटी परियोजनाओं, विशेष रूप से कलादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट और भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग को गति देने पर सहमति जताई। व्यापार को बढ़ावा देने के लिए रुपया-क्यात निपटान तंत्र का विस्तार किया जाएगा। सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने और एक-दूसरे के हितों को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को रोकने पर भी बल दिया गया।

• भारत-म्यांमार के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी की पुष्टि, सहयोग के नए आयाम • महत्वाकांक्षी कनेक्टिविटी परियोजनाओं को मिलेगी नई ऊर्जा, क्षेत्रीय जुड़ाव बढ़ेगा • व्यापार, निवेश और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग का विस्तार, रुपया-क्यात तंत्र को बढ़ावा • म्यांमार ने सुरक्षा हितों के विरुद्ध भूमि के उपयोग को रोकने का दिया आश्वासन ने बताया कि भारत और म्यांमार ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने तथा द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लिया है। यह महत्वपूर्ण सहमति म्यांमार के वरिष्ठ जनरल मिन आंग ह्लाइंग की भारत की आधिकारिक यात्रा के दौरान बनी, जो उनके देश के शीर्ष नेता के रूप में भारत की उनकी पहली यात्रा थी। 30 मई से 3 जून तक चली इस यात्रा में दोनों देशों के नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों की वर्तमान स्थिति की गहन समीक्षा की और आपसी हित के क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

यात्रा के दौरान, दोनों पक्षों ने भारत और म्यांमार के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और क्षेत्रीय एकीकरण को बढ़ावा देने वाली प्रमुख कनेक्टिविटी परियोजनाओं को प्राथमिकता देने पर सहमति जताई। इसमें कलादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट और भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाएं शामिल हैं, जिनके विकास में तेजी लाने पर जोर दिया गया। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इन परियोजनाओं के पूरा होने से दोनों देशों के बीच व्यापार और आवागमन में सुविधा होगी, जिससे आर्थिक विकास को गति मिलेगी।

व्यापार और वाणिज्य के क्षेत्र में सहयोग को और बढ़ावा देने के उद्देश्य से, दोनों देशों ने रुपया-क्यात निपटान तंत्र के माध्यम से द्विपक्षीय व्यापार को सुविधाजनक बनाने पर भी सहमति व्यक्त की। मई 2024 में शुरू किए गए इस तंत्र के तहत व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। दोनों देशों ने कृषि-प्रसंस्करण, पेट्रोलियम, ऊर्जा और खनन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में व्यापार और निवेश सहयोग का विस्तार करने में गहरी रुचि व्यक्त की। इस दिशा में, राष्ट्रपति ह्लाइंग ने नई दिल्ली में आयोजित भारत-म्यांमार बिजनेस कॉन्क्लेव में भी भाग लिया, जहां दोनों देशों के व्यापारिक नेताओं ने भविष्य के अवसरों पर चर्चा की।

शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के लिए, भारत ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। इसके तहत, 2026 से म्यांमार के छात्रों के लिए मेकांग गंगा आईसीसीआर छात्रवृत्ति की संख्या 36 से बढ़ाकर 100 कर दी जाएगी। यह पहल म्यांमार के युवाओं को उच्च शिक्षा के अवसर प्रदान करेगी और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देगी।

सुरक्षा सहयोग चर्चा का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू रहा। भारत ने म्यांमार की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपना अटूट समर्थन दोहराया। वहीं, दोनों देशों ने एक-दूसरे के राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के लिए हानिकारक किसी भी गतिविधि को रोकने के महत्व पर बल दिया। म्यांमार की ओर से यह आश्वासन दिया गया कि उसकी भूमि का उपयोग भारतीय सुरक्षा हितों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की गतिविधियों के लिए नहीं किया जाएगा। राष्ट्रपति ह्लाइंग ने अपनी यात्रा के दौरान बोधगया में महाबोधि मंदिर सहित कई बौद्ध स्थलों का दौरा भी किया, जो दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को दर्शाता है। उन्होंने ग्रेटर नोएडा में एनटीपीसी एनर्जी टेक्नोलॉजी रिसर्च अलायंस (नेट्रा) सुविधा का भी दौरा किया, ताकि भारत की स्वच्छ ऊर्जा और अनुसंधान में प्रगति को समझा जा सके।

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