स्वास्थ्य मंत्री की अपील: योग बने जीवनशैली, सिर्फ एक दिन का उत्सव नहीं
स्वास्थ्य मंत्री ने योग को जीवन का अभिन्न अंग बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि योग को केवल एक दिन के आयोजन तक सीमित नहीं रखना चाहिए। वर्ष भर योग को बढ़ावा देने के लिए नई पहलें शुरू की जाएंगी। राज्य भर में योग गतिविधियों के समन्वय के लिए तीन क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित किए जाएंगे। 2.5 लाख प्रशिक्षकों की भागीदारी के साथ, योग को जन-जन तक पहुंचाने का लक्ष्य है। • योग को दैनिक जीवन में अपनाने की आवश्यकता • वर्ष भर योग को बढ़ावा देने की योजना • प्रशिक्षकों की संख्या में वृद्धि • योग को जीवनशैली बनाने पर जोर ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री ने योग को केवल अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस तक सीमित रखने के बजाय इसे जीवन का एक स्थायी हिस्सा बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि योग के लाभों को पूरे वर्ष अनुभव किया जाना चाहिए।
स्वास्थ्य मंत्री ने योग को केवल एक दिवसीय आयोजन तक सीमित रखने की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए, इसे जीवन का एक स्थायी हिस्सा बनाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि योग के गहन लाभों को तभी पूरी तरह से आत्मसात किया जा सकता है जब इसे दैनिक जीवनचर्या का अभिन्न अंग बनाया जाए, न कि केवल अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मनाया जाए। इस महत्वपूर्ण संदेश को जन-जन तक पहुंचाने और योग को व्यापक रूप से बढ़ावा देने के लिए, राज्य सरकार वर्ष भर चलने वाली विभिन्न पहलों की शुरुआत कर रही है।
• योग को जीवनशैली के रूप में अपनाने की आवश्यकता पर स्वास्थ्य मंत्री का बल • वर्ष भर योग को बढ़ावा देने के लिए व्यापक सरकारी पहलों की घोषणा • क्षेत्रीय कार्यालयों की स्थापना से योग गतिविधियों के समन्वय और विस्तार की योजना • प्रशिक्षकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि से योग के प्रति जागरूकता और भागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य
ने प्राप्त आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया कि स्वास्थ्य मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह मानसिक शांति और आध्यात्मिक विकास का भी एक शक्तिशाली माध्यम है। उन्होंने कहा, "योग को हमारी संस्कृति और जीवनशैली का हिस्सा बनना चाहिए, न कि केवल एक वार्षिक कार्यक्रम का हिस्सा।" इस विजन को साकार करने के लिए, राज्य भर में योग से संबंधित गतिविधियों के प्रभावी समन्वय और निगरानी हेतु तीन क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित किए जाएंगे। ये कार्यालय सुनिश्चित करेंगे कि योग को पूरे वर्ष सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया जाए।
प्रशिक्षकों की भागीदारी में वृद्धि एक महत्वपूर्ण कदम है। जहाँ पिछले वर्ष लगभग 1.5 लाख प्रशिक्षकों ने योग दिवस समारोहों में भाग लिया था, वहीं इस वर्ष यह संख्या बढ़ाकर 2.5 लाख कर दी गई है। यह वृद्धि योग के प्रति बढ़ती जागरूकता और इसके प्रसार में प्रशिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाती है। इसके अलावा, 'योगंध्र' कार्यक्रम के तहत संचालित की जा रही विभिन्न पहलों की प्रगति और प्रभावशीलता की निरंतर निगरानी के लिए एक समर्पित 'वॉर रूम' की स्थापना की जाएगी। यह सुनिश्चित करेगा कि सभी कार्यक्रम सुचारू रूप से चलें और निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करें।
जागरूकता अभियान 7 जून से 21 जून तक चलेगा, जिसमें विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्य अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का भव्य आयोजन 21 जून को राज्य की राजधानी अमरावती में किया जाएगा। एक विशेष आकर्षण के रूप में, अमरावती में कृष्णा नदी पर बने पुल पर 25,000 प्रतिभागियों के साथ एक विशाल योग सत्र आयोजित करने की योजना है, जो एक अभूतपूर्व दृश्य प्रस्तुत करेगा। इसके अतिरिक्त, राज्य के प्रत्येक जिले में दो प्रमुख पर्यटन स्थलों पर योग प्रदर्शनों का आयोजन किया जाएगा, जिससे पर्यटकों और स्थानीय लोगों को योग से जोड़ा जा सके। उदाहरण के लिए, गुंटूर जिले में उंडावली गुफाओं और मंगलागिरी लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर को चुना गया है, जबकि नंद्याल जिले में श्रीशैलम मंदिर और महानंदी मंदिर में कार्यक्रम होंगे।
योग को प्रतिस्पर्धात्मक भावना से बढ़ावा देने के लिए, 'योगंध्र' के तहत चार चरणों में योग प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी। इनमें ग्राम और वार्ड स्तर (7-9 जून), मंडल स्तर (10-12 जून), जिला स्तर (14-16 जून), और राज्य स्तरीय फाइनल (18-20 जून) विजयवाड़ा में शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य योग को जन-जन तक पहुंचाना और इसे एक स्वस्थ जीवनशैली के रूप में स्थापित करना है।


