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National/State01 Jun 2026, 09:15 pm

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने म्यांमार समकक्ष से की भेंट, साझा बौद्ध विरासत और सदियों पुराने संबंधों पर जोर

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने म्यांमार समकक्ष से की भेंट, साझा बौद्ध विरासत और सदियों पुराने संबंधों पर जोर

नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग से मुलाकात की। राष्ट्रपति मुर्मू ने साझा बौद्ध विरासत और सदियों पुराने लोगों के बीच संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि म्यांमार दक्षिण पूर्व एशिया का भारत का प्रवेश द्वार है। उन्होंने म्यांमार में शांति और सुलह की उसकी कवायद के लिए भारत के दृढ़ समर्थन को व्यक्त किया। • साझा विरासत पर जोर • भारत का समर्थन व्यक्त • म्यांमार का महत्व • द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा ने बताया कि राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग की भारत यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर सहमति बनी।

नई दिल्ली: भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक की। इस मुलाकात के दौरान, राष्ट्रपति मुर्मू ने भारत और म्यांमार के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंधों पर प्रकाश डाला, विशेष रूप से साझा बौद्ध विरासत के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने म्यांमार को दक्षिण पूर्व एशिया के लिए भारत का एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार बताया और म्यांमार द्वारा शांति एवं सुलह स्थापित करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के लिए भारत के अटूट समर्थन को दोहराया।

• ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का उत्सव: बौद्ध विरासत का संगम • भारत की 'पड़ोसी प्रथम' और 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत म्यांमार का महत्व • द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ह्लाइंग के बीच चर्चा • म्यांमार में शांति और स्थिरता के लिए भारत की प्रतिबद्धता और सहयोग

को राष्ट्रपति सचिवालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, "साझा बौद्ध विरासत और सदियों पुराने लोगों के बीच संबंध भारत-म्यांमार संबंधों को एक अनूठी गर्माहट प्रदान करते हैं।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि म्यांमार भारत के लिए दक्षिण पूर्व एशिया का प्रवेश द्वार है और भारत, म्यांमार में शांति एवं सुलह की उसकी कवायद का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह बयान भारत की 'पड़ोसी प्रथम' और 'एक्ट ईस्ट' नीतियों के अनुरूप है, जो क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित हैं।

इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद हाउस में म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, विकास साझेदारी, क्षमता निर्माण, सुरक्षा और सीमा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने पर सहमति व्यक्त की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता, रणधीर जयसवाल ने एक्स पर इस बैठक की जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार को भारत का एक विश्वसनीय पड़ोसी और संकट के समय पहला प्रतिक्रिया देने वाला देश बताया। उन्होंने म्यांमार में शांति और संवाद को बढ़ावा देने के लिए भारत की तत्परता की भी पुष्टि की, जिसमें संघीय शासन और आर्थिक विकास के अनुभवों को साझा करना शामिल है।

राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग अपनी पांच दिवसीय भारत यात्रा की शुरुआत शनिवार को बिहार के बोधगया स्थित ऐतिहासिक महाबोधि मंदिर में प्रार्थना करके की थी, जो भारत के साथ उनके आध्यात्मिक जुड़ाव को दर्शाता है। यह यात्रा दोनों देशों के बीच बहुआयामी संबंधों को और मजबूत करने तथा भविष्य में सहयोग के नए रास्ते खोलने की उम्मीद है। म्यांमार के राष्ट्रपति की यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देश क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के तरीकों पर विचार कर रहे हैं।

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